Friday, April 24, 2020

लॉकडउन में कैसे करे समय का उपयोग...?


कोरोनावायरस महामारी ने हमें घर में रहने के लिए मजबूर कर दिया है।
इसे नए कौशल सीखने के अवसर में बदल सकतें हैं।
ये 10 तरीके हैं जिनसे छात्र कोविड -19 लॉकडाउन का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।


1. योगा कर सकते हैं।
व्यायाम करने से लचीलापन,शक्ति, और गतिशीलता में सुधार होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कोरोनावायरस महामारी के दौरान आपकी प्रतिरक्षा बनाने में मदद कर सकता है। अपने जीवन को नष्ट करने और अपनी आत्मा को आराम करने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें।।आप हर समय किराने का सामान खरीदने और बाहर जाने में सक्षम नहीं होते हैं, इसलिए इन दिनों की डाइट प्लान बनाएं और अपनी ज़रूरत की सभी चीज़ों को सूचीबद्ध करें ताकि आप उन सभी को एक बार में खरीद सकें। यह लॉकडाउन के दौरान घर पर रहने के दौरान आपको स्वस्थ बना देगा।

2.घर पर पौधे लगाए।
इस covid -19 लॉकडाउन समय का उपयोग आपके बगीचे में उगते पौधों में किया जा सकता है। जितना हो सके उतने पौधे उगाएं।  जैसा कि दुनिया स्वच्छ हवा से वंचित है, भले ही आप उन्हें देखने के लिए न हों। यदि आप 5 से 10 ऑक्सीजन उत्सर्जक पौधे उगाते हैं, तो आप पहले से मौजूद संसाधनों से जुड़ जाएंगे। । यह बीमारियों को भी रोकेगा। चूंकि कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान ताजी सब्जियां उपलब्ध होने में कठिनाई हो सकती हैं, इसलिए आप घर पर भी सब्जियां उगा सकते हैं और बिना पैसे खर्च किए और बाहर जाकर जैविक सब्जी की आपूर्ति कर सकते हैं।

3. अपने परिवार के साथ समय बिताए।
सबसे अच्छा समय हमारे प्रियजनों के साथ बिताया गया समय है। चूँकि हम कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान बाहर नहीं जा सकते हैं, इसलिए इसे उन लोगों के साथ समय बिताने का अवसर दें,जो हमेशा हमारे लिए हैं।   इस तरह आप नए जीवन कौशल सीखेंगे और जो भविष्य में आपकी मदद करेंगे।

4. पेंटिंग शुरू करे !
 प्रत्येक दिन, आप अपने समय के एक घंटे के लिए पेंटिंग दे सकते हैं और बस उस दिन जो भी विचार प्राप्त करते हैं, उसके साथ प्रयोग करें। यह एक फल, एक स्मृति, एक जगह या पेंट के साथ अमूर्त डिजाइनों से कुछ भी हो सकता है। चित्रकारी अभिव्यक्ति का एक बहुत ही स्वाभाविक रूप है और यह ध्यानपूर्ण भी हो सकता है क्योंकि यह आपके दिमाग को शांत करता है और इसे शांत रखता है।

5. शीर्ष फिल्में और शैक्षिक टीवी श्रृंखला देखें।
टीवी श्रृंखला की एक लंबी सूची है जो आपको विभिन्न विषयों पर शिक्षित करेगी। । अपनी पसंद की शैली चुनें और उन्हें ऑनलाइन देखें।

6. किताबे पढ़े।
 जीवन में पुस्तकों का बहुत महत्त्व होता है इसलिए इस फ्री समय में आप वे सभी पुस्तके
 पढ़ सकते है। अगर आपके पास वे पुस्तके उपलब्ध नहि है तो आप उन्हें ऑनलाइन भी पढ़ सकते है।

7. तस्वीरें क्लिक करें।
फोटोग्राफर नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि आप तस्वीरें क्लिक नहीं कर सकते। नई चीजों का पता लगाने या अपनी जगह से बाहर निकलने में सक्षम न होना किसी भी प्रतिभा को प्रतिबंधित नहीं करता है। आवश्यकता अविष्कार की जननी है यह पता करें कि आप अपने घर के आसपास क्या फोटो खींच सकते हैं।


8. कोई भाषा सीखे।
भाषा सीखना एक मजेदार अनुभव है लेकिन इसके लिए समर्पण की आवश्यकता है। सीखी गई एक भाषा आपको दूसरों पर बढ़त दिलाएगी। यह आपके करियर में आपकी मदद करेंगे  । यह भविष्य में शिक्षा और नौकरियों के नए रास्ते खोलेगा। नई भाषाओं को आसानी से सीखने के लिए विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम और मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।

9. खेल खेलें।
कई घरों में एक शतरंज बोर्ड या एक लूडो बोर्ड या दोनों होंगे! शतरंज के साथ अपने मानसिक कौशल को तेज करें ! यह आपके सभी परिवार के सदस्यों को पूरी तरह से संलग्न कर सकता है, जबकि आप सभी कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान एक साथ होते हैं

10. भविष्य के लक्ष्यों के बारे में पढ़ें।
करियर प्लानिंग और लाइफ गोल पर किताबें, पत्रिकाएं, ऑनलाइन वेबसाइट पढ़ें और जीवन में अपने लक्ष्यों की योजना बनाएं।  लॉकडाउन के दौरान अपने लक्ष्यों पर काम करना शुरू कर दें। ऐसी पत्रिकाओं और पुस्तकों का अध्ययन करें जो आपको अपने सपनों के करीब ले जाएँ और उन पर काम करना शुरू करें। यह अभ्यास कोरोनावायरस लॉकडाउन अवधि के दौरान सबसे अधिक फलदायी अभ्यास बन सकता है।

Monday, December 16, 2019

शिक्षक क्लास में कैसे करे व्यव्हार....

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नमस्कार दोस्तों , आज में अपने शिक्षक मित्रों के लिए कुछ उपयोगी टिप्स के बारे में बात करना चाहूंगा जिनका उपयोग कर क्लास में बच्चो को कंट्रोल कर सकते हैं|आज के बदलते समय में बच्चो के व्यव्हार में परिवर्तन आना एक सामान्य बात हैं और कुछ समय कुछ ऐसे स्थिति बन जाती है जहा शिक्षक/शिक्षिका को बेहद संजीदगी से उस स्थिति से पार पाना होता है |

कक्षा में टीचर को बच्चों से बेहद संजीदगी से बात करनी चाहिए। इससे बच्चे अनुशासित रहते हैं और उनमें आज्ञाकारिता बनी रहती है। बच्चों को हमेशा यह अहसास दिलाना जरूरी है कि उनकी शरारतों की जगह स्कूल नहीं हैऔर शरारत करने का समय भी स्कूल में नहीं रहता हैं | उन्हें यह भी बताते रहना चाहिए कि उनके स्कूल में किस तरह का व्यव्हार करना चाहिए और कहां वे अपनी लिमिट क्रॉस करते हैं।
प्री प्राइमरी और प्राइमरी बच्चो और टीचर, दोनों के लिए बहुत उपयोगी समय हैं इसलिए टीचर्स को इस समय बच्चो से एक स्नेह पूर्ण व्यव्हार करना चाहिए | एक और जहाँ टीचर्स पर बच्चो की बेहतर एजुकेशन का प्रेशर रहता हैं वही दूसरी और उनकी जिम्मेदारी बच्चो के अच्छे व्यव्हार,आचरण के प्रति भी बाद जाती हैं |यह एक महत्वपूर्ण और उपयोगी समय होता हैं जब एक बच्चा अपने आने वाले भविष्य के पथ पर अपने नन्हे कदमो को आगे बड़ा रहा होता हैं|
हायर एजुकेशन में यह बर्ताव बदलता है। वहां ज्यादा से ज्यादा दोस्ताना बर्ताव करना चाहिए। स्टूडेंट्स को जब लगेगा कि आप उनकी उम्र और भावनाओं को समझने वालों में से एक हैं तो सिर्फ वे आपके कहने में रहेंगे, बल्कि जो सब्जेक्ट्स आप उन्हें पढ़ाएंगे उसमें उनकी दिलचस्पी भी बढ़ेगी।आप कोशिश करें कि पूरी क्लास से आपका बर्ताव एक जैसा हो।

अगर क्लास के अंदर टीचर के पढ़ाने के दौरान बच्चे शोर मचाते हैं तो इस समय टीचर्स को अपने पढ़ाने को और अधिक रुचिकर और प्रभावशील बनाना होगा, क्योकि कई बार ऐसा पाया जाता है की क्लास में शोर होने का कारण आपका क्लास में अधिक सजग ना होना होता है जिससे बच्चे क्लास में ध्यान नहीं लगा पाते है। बच्चों का नेचर है शैतानी करना और शोर मचाना। टीचर क्लास में पूरे ध्यान से पढ़ाएं तो बच्चे भी ध्यान से पढ़ेंगे। छोटी क्लासेस में टीचर्स को शोर पर काबू पाने के लिए पनिशमेंट की बजाय पेशेंस का दांव खेलना चाहिए। कम उम्र के बच्चों को पनिश करना एक हद तक ही कारगर होता है, टीचर बार-बार इस नुस्खे को आजमाएंगे तो बच्चे सुधरने के बदले रिएक्ट करने लगेंगे। हां, धीरज से अगर उन्हें समझाया जाए और पढ़ाई में दिलचस्पी पैदा करने के लिए टीचर अपनी तरफ से कोशिश करें तो शोर का जोर कम पड़ता जाएगा।

बड़ी क्लासेस में यह काम स्टूडेंट्स के टेंपरामेंट (मिजाज) को समझकर आसानी से किया जा सकता है। स्टूडेंट्स के मिजाज को भांपने और उसके मुताबिक बदलने में टीचर को दूर नहीं रहना चाहिए। दिक्कत तब पैदा होती है जब टीचर अपने सामने पढ़ने आए स्टूडेंट्स पर कोई राय कायम किए बिना कोर्स को सिर्फ पढ़ा कर क्लास का समय बिता देते हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स इंगेज नहीं हो पाते और क्लास में शोर करने के अलावा वैसी अनुशासनहीनता भी करते हैं जो उनकी उपस्तिथि को कमजोर करता है।

प्राइमरी क्लासेस में टीचर बच्चों पर निगाह रखते हैं। उनकी हर हरकत पर ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसी उम्र में वे बहुत-सी अच्छी-बुरी आदतें सीखते हैं। ऐसे में उनसे सीधे बातचीत की दरकार होती है। इस सिलसिले में बच्चों से बहुत सीधा रिश्ता रखना चाहिए। उनकी घरेलू परिस्थितियों का भी पता रखना चाहिए। इससे बच्चों की गलती और उसके कारण को समझने में ही नहीं, बल्कि उन गलतियों से बच्चों को दूर रखने में भी मदद मिलती है। बच्चों की गलतियों की ओर ध्यान खींचने जितना ही अहम है उसकी अच्छाइयों की ओर लगातार ध्यान दिलाना। इससे बच्चे भटकेंगे नहीं। जहां कहीं भटकाव दिखे, उसे वहीं मार्क करना और बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए टीचर को समझदारी से वापसी के उन रास्तों को तलाशना चाहिए जिससे बच्चे फिर से राह पर सकें। मिसाल के तौर पर, एक टीचर ने जब किसी लड़के अथवा लड़कियों में जरूरत से ज्यादा अनुशाशनहीनता को देखा तो वह खुद उसके पास गए और कहा कि मैं तुम्हारे घरवालों से बात करूंगा। यहां आकर पैसा और वक्त बर्बाद करने की जरूरत नहीं है।ऐसी स्थति में बच्चे घबरा जाते हैं और उन्हें अपनी गलती का एहसास भी होता हैं | इसके बाद टीचर ने उन्हें समझाया कि इस समय पढाई सबसे जरूरी है और बच्चो ने पढ़ाई में मन लगाना शुरू कर दिया।